| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा » श्लोक 79-80 |
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| | | | श्लोक 1.220.79-80  | युधिष्ठिरात् प्रतिविन्ध्यं सुतसोमं वृकोदरात्।
अर्जुनाच्छ्रुतकर्माणं शतानीकं च नाकुलिम्॥ ७९॥
सहदेवाच्छ्रुतसेनमेतान् पञ्च महारथान्।
पाञ्चाली सुषुवे वीरानादित्यानदितिर्यथा॥ ८०॥ | | | | | | अनुवाद | | युधिष्ठिर से प्रतिविन्ध्य, भीमसेन से सुतसोम, अर्जुन से श्रुतकर्मा, नकुल से शतानीक और सहदेव से श्रुतसेन का जन्म हुआ। पांचाली (द्रौपदी) ने इन पांच वीर महारथी पुत्रों को उसी प्रकार जन्म दिया, जैसे अदिति ने बारह आदित्यों को जन्म दिया था। 79-80॥ | | | | Prativindhya was born from Yudhishthira, Sutasoma from Bhimsen, Shrutakarma from Arjun, Shatanika from Nakul and Shrutasena was born from Sahadeva. Panchali (Draupadi) gave birth to these five brave Maharathi sons in the same way as Aditi gave birth to the twelve Adityas. 79-80॥ | | ✨ ai-generated | | |
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