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mahabharat 1.220.78: शुभलक्षणा पांचाली को भी अपने पांच पतियों से पांच श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त हुए। वे सभी वीर और पर्वतों के समान दृढ़ थे। 78.   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.220.78 
पाञ्चाल्यपि तु पञ्चभ्य: पतिभ्य: शुभलक्षणा।
लेभे पञ्च सुतान् वीराञ्श्रेष्ठान् पञ्चाचलानिव॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
शुभलक्षणा पांचाली को भी अपने पांच पतियों से पांच श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त हुए। वे सभी वीर और पर्वतों के समान दृढ़ थे। 78.
 
Shubhlakshana Panchali also received five excellent sons from her five husbands. All of them were brave and as steadfast as mountains. 78.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)