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mahabharat 1.220.74: धनंजय ने अभिमन्यु को अस्त्र-शस्त्र के ज्ञान और प्रयोग में अपने समान बना लिया था। सुभद्रा के पुत्र को देखकर वे बहुत संतुष्ट हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.220.74 
आगमे च प्रयोगे च चक्रे तुल्यमिवात्मना।
तुतोष पुत्रं सौभद्रं प्रेक्षमाणो धनंजय:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
धनंजय ने अभिमन्यु को अस्त्र-शस्त्र के ज्ञान और प्रयोग में अपने समान बना लिया था। सुभद्रा के पुत्र को देखकर वे बहुत संतुष्ट हुए।
 
Dhananjaya had made Abhimanyu his equal in the knowledge and use of weapons. He was very satisfied on seeing Subhadra's son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)