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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक 70
श्लोक
1.220.70
दयितो वासुदेवस्य बाल्यात् प्रभृति चाभवत्।
पितॄणामिव सर्वेषां प्रजानामिव चन्द्रमा:॥ ७०॥
अनुवाद
जैसे समस्त पितर और प्रजा चंद्रमा को प्रिय हैं, वैसे ही अभिमन्यु भी बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय था ॥ 70॥
Just as all ancestors and subjects love the Moon, similarly Abhimanyu had been very dear to Lord Krishna since his childhood. ॥ 70॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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