स सात्वत्यामतिरथ: सम्बभूव धनंजयात्।
मखे निर्मथनेनेव शमीगर्भाद्धुताशन:॥ ६८॥
अनुवाद
जैसे यज्ञ में मंथन करने पर शमी के गर्भ से उत्पन्न अश्वत्थ से अग्नि प्रकट होती है, उसी प्रकार अर्जुन के द्वारा सुभद्रा के गर्भ से अतिरथी वीर उत्पन्न हुआ ॥68॥
Just as fire appears from the ashvattha born from the womb of Shami when churned in a yagya, in the same way that Atirathi Veera was born from the womb of Subhadra through Arjun. 68॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥