श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  1.220.67 
अभिश्च मन्युमांश्चैव ततस्तमरिमर्दनम्।
अभिमन्युमिति प्राहुरार्जुनिं पुरुषर्षभम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
वह अभि (निर्भय) और मन्युमान (क्रोध में लड़ने वाला) था, इसीलिए पुरुषोत्तम अर्जुन कुमार को 'अभिमन्यु' कहा जाता है ॥67॥
 
He was Abhi (fearless) and Manyuman (one who fights in anger), that is why Purushottam Arjun Kumar is called 'Abhimanyu'. 67॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)