श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.220.64 
व्यचरद् यमुनातीरे मृगयां स महायशा:।
मृगान् विध्यन् वराहांश्च रेमे सार्धं किरीटिना॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
महाबली श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ यमुना के तट पर भ्रमण करते हुए जंगली सूअर आदि हिंसक पशुओं का वध करते थे। इस प्रकार वे किरीटधारी अर्जुन के साथ भ्रमण करते थे। 64॥
 
The great Sri Krishna used to wander on the banks of Yamuna while hunting with Arjuna and killing wild boars and ferocious animals. In this way he used to travel with the crowned Arjuna. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)