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mahabharat 1.220.59: जैसे पुण्यात्मा पुरुष स्वर्गलोक में सुख भोगते हैं, उसी प्रकार कुरु, वृष्णि और अंधकवंशी वे श्रेष्ठ पुरुष एकत्र होकर अपनी इच्छानुसार विचरण करने लगे ॥59॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  1.220.59 
ते समेता महात्मान: कुरुवृष्ण्यन्धकोत्तमा:।
विजह्रुरमरावासे नरा: सुकृतिनो यथा॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
जैसे पुण्यात्मा पुरुष स्वर्गलोक में सुख भोगते हैं, उसी प्रकार कुरु, वृष्णि और अंधकवंशी वे श्रेष्ठ पुरुष एकत्र होकर अपनी इच्छानुसार विचरण करने लगे ॥59॥
 
Just as virtuous people enjoy happiness in the heavenly world, in the same way, those great great men of Kuru, Vrishni and Andhaka dynasty gathered together and started roaming around as per their wish. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)