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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक 5
श्लोक
1.220.5
एतान् दोषांस्तु कौन्तेयो दृष्टवानिति मे मति:।
अत: प्रसह्य हृतवान् कन्यां धर्मेण पाण्डव:॥ ५॥
अनुवाद
'मैं मानता हूँ कि कुन्तीकुमार ने ये सब दोष देख लिये हैं; इसलिये क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए उन्होंने बलपूर्वक कन्या का अपहरण कर लिया है।॥5॥
'I believe that Kuntikumar has seen all these faults; therefore, in keeping with the kshatriya dharma, he has abducted the girl forcefully.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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