श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  1.220.49-50 
स्नानपानोत्सवे चैव प्रयुक्तं वयसान्वितम्।
स्त्रीणां सहस्रं गौरीणां सुवेषाणां सुवर्चसाम्॥ ४९॥
सुवर्णशतकण्ठीनामरोमाणां स्वलंकृताम्।
परिचर्यासु दक्षाणां प्रददौ पुष्करेक्षण:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
कमल-नेत्र भगवान श्रीकृष्ण ने एक हजार गौर वर्ण वाली कन्याएँ भी दीं, जो स्नान, जलपान और उत्सव में काम आती थीं, जो पूर्ण आयु की थीं, जिनका वेश सुन्दर और कान्ति मनोहर थी, जो सौ स्वर्ण-रत्नों से जड़ित हार पहनती थीं, जिनके शरीर पर एक भी केश नहीं था, जो वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित थीं और जो सेवाकार्य में पूर्णतया निपुण थीं।
 
The lotus-eyed Lord Krishna also presented one thousand fair-skinned girls who were used in bathing, drinking and celebrating, who were of full age, whose attire was beautiful and whose radiance was charming, who wore necklaces studded with a hundred golden gems, whose bodies did not have any hair, who were decked with clothes and ornaments and who were fully adept in the work of service.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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