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mahabharat 1.220.42: कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने वृष्णि तथा अन्धक वंश के श्रेष्ठ पुरुषों का यथोचित सत्कार किया। 42॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.220.42 
तांश्च वृष्ण्यन्धकश्रेष्ठान् कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:।
प्रतिजग्राह सत्कारैर्यथाविधि यथागतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर ने वृष्णि तथा अन्धक वंश के श्रेष्ठ पुरुषों का यथोचित सत्कार किया। 42॥
 
Kuntinandan Yudhishthir welcomed the best men of Vrishni and Andhaka dynasty in a proper manner. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)