श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.220.39 
सम्पूज्यमान: पौरैश्च ब्राह्मणैश्च सहस्रश:।
विवेश भवनं राज्ञ: पुरन्दरगृहोपमम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
नगरवासियों और हजारों ब्राह्मणों द्वारा सम्मानित होकर वह राजमहल में प्रविष्ट हुआ। वह भवन इन्द्र भवन की शोभा से भी अधिक शोभायमान था।
 
Honored by the citizens of the city and thousands of Brahmins, he entered the royal palace. That house was even outshining the beauty of Indra Bhawan. 39.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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