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mahabharat 1.220.36: नगर की सड़कें साफ़-सुथरी थीं। उन पर जल छिड़का जा रहा था। नगर को जगह-जगह पुष्प-मालाओं से सजाया गया था। शीतल चंदन, रस और अन्य पवित्र सुगन्धित पदार्थों की सुगंध सर्वत्र फैल रही थी।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.220.36 
सम्मृष्टसिक्तपन्थानं पुष्पप्रकरशोभितम्।
चन्दनस्य रसै: शीतै: पुण्यगन्धैर्निषेवितम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
नगर की सड़कें साफ़-सुथरी थीं। उन पर जल छिड़का जा रहा था। नगर को जगह-जगह पुष्प-मालाओं से सजाया गया था। शीतल चंदन, रस और अन्य पवित्र सुगन्धित पदार्थों की सुगंध सर्वत्र फैल रही थी।
 
The streets of the city were swept and cleaned. Water was sprinkled on them. The city was decorated with flower garlands at various places. The fragrance of cool sandalwood, juice and other sacred aromatic substances was spreading everywhere. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)