श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.220.35 
ताभ्यां प्रतिगृहीतं तु वृष्णिचक्रं महर्द्धिमत्।
विवेश खाण्डवप्रस्थं पताकाध्वजशोभितम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
उनके द्वारा स्वागत किया गया अत्यंत समृद्ध वृष्णि समुदाय खांडवप्रस्थ में प्रवेश कर रहा था। उस समय वह नगर ध्वजाओं और पताकाओं से सुसज्जित और शोभायमान था। 35.
 
The extremely prosperous group of Vrishnis welcomed by them entered Khandavaprastha. At that time, the city was decorated with flags and banners and looked beautiful. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)