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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक 29
श्लोक
1.220.29
तत्र दानपतिर्धीमानाजगाम महायशा:।
अक्रूरो वृष्णिवीराणां सेनापतिररिंदम:॥ २९॥
अनुवाद
उस समय वृष्णि योद्धाओं के सेनापति शत्रुध्न, महाप्रज्ञ एवं दानवीर अक्रूरजी भी वहाँ आये ॥29॥
At that time, the commander of the Vrishni warriors, Shatrudhaman, the great and the wise donor, Akrurji also came there. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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