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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
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श्लोक 2
श्लोक
1.220.2
नावमानं कुलस्यास्य गुडाकेश: प्रयुक्तवान्।
सम्मानोऽभ्यधिकस्तेन प्रयुक्तोऽयं न संशय:॥ २॥
अनुवाद
'निद्रा को जीतने वाले अर्जुन ने इस कुल का अपमान नहीं किया है, अपितु ऐसा करके उन्होंने इस कुल का अधिक सम्मान किया है, इसमें संशय नहीं है॥ 2॥
'Sleep conqueror Arjun has not insulted this clan. Rather, by doing so he has shown more respect for this clan, there is no doubt about it.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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