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mahabharat 1.220.18: ये सब बातें कहकर कृष्ण विलाप करने लगे। तब धनंजय ने उन्हें सांत्वना दी और बार-बार अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.220.18 
तथा बहुविधं कृष्णां विलपन्तीं धनंजय:।
सान्त्वयामास भूयश्च क्षमयामास चासकृत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ये सब बातें कहकर कृष्ण विलाप करने लगे। तब धनंजय ने उन्हें सांत्वना दी और बार-बार अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी।
 
Krishna started to lament by saying all these things. Then Dhananjaya consoled her and repeatedly asked for forgiveness for his crime.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)