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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.220.12 
तच्छ्रुत्वा वासुदेवस्य तथा चक्रुर्जनाधिप॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! वसुदेव के ये वचन सुनकर यादवों ने भी वैसा ही किया।
 
Janamejaya! On hearing these words of Vasudeva the Yadavas did the same.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)