श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  1.220.11-12h 
यदि निर्जित्य व: पार्थो बलाद् गच्छेत् स्वकं पुरम्॥ ११॥
प्रणश्येद् वो यश: सद्यो न तु सान्त्वे पराजय:।
 
 
अनुवाद
"यदि अर्जुन तुम्हें बलपूर्वक हराकर उसके नगर में चला जाए, तो तुम्हारा सारा वैभव तत्काल नष्ट हो जाएगा, परंतु उसे सान्त्वना देकर वापस लाने में कोई पराजय नहीं है।" ॥11/2॥
 
"If Arjuna defeats you by force and goes to his city, then all your glory will be lost immediately, but there is no defeat in bringing him back with consolation." ॥ 11/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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