श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 22: नागोंद्वारा उच्चै:श्रवाकी पूँछको काली बनाना; कद्रू और विनताका समुद्रको देखते हुए आगे बढ़ना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.22.8 
आकरं सर्वरत्नानामालयं वरुणस्य च।
नागानामालयं चापि सुरम्यं सरितां पतिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह नदियों का स्वामी सब प्रकार के रत्नों का भण्डार, वरुण का निवासस्थान और सर्पों का सुन्दर घर था। 8.
 
That Lord of the rivers was a mine of all kinds of gems, the abode of Varuna and the beautiful home of the serpents. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)