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mahabharat 1.218.23: अतः हे अर्जुन! मेरी तो यही राय है कि तुम मेरी शुभ बहन को बलपूर्वक हर लो। स्वयंवर में उसका क्या उद्देश्य होगा, यह कौन जाने - वह किसे चुनेगी?॥23॥   |   mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.218.23 
स त्वमर्जुन कल्याणीं प्रसह्य भगिनीं मम।
हर स्वयंवरे ह्यस्या: को वै वेद चिकीर्षितम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अतः हे अर्जुन! मेरी तो यही राय है कि तुम मेरी शुभ बहन को बलपूर्वक हर लो। स्वयंवर में उसका क्या उद्देश्य होगा, यह कौन जाने - वह किसे चुनेगी?॥23॥
 
Therefore, Arjuna! My opinion is that you should take away my auspicious sister by force. Who knows what will be her intention in the swayamvara - whom will she choose?॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)