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mahabharat 1.218.20: जनार्दन! मुझे बताइए, इसकी प्राप्ति का क्या उपाय हो सकता है? यदि मनुष्यों के लिए ऐसा करना संभव हो, तो मैं अवश्य ही पूर्ण प्रयत्न करूँगा।॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.218.20 
प्राप्तौ तु क उपाय: स्यात् तं ब्रवीहि जनार्दन।
आस्थास्यामि तदा सर्वं यदि शक्यं नरेण तत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! मुझे बताइए, इसकी प्राप्ति का क्या उपाय हो सकता है? यदि मनुष्यों के लिए ऐसा करना संभव हो, तो मैं अवश्य ही पूर्ण प्रयत्न करूँगा।॥20॥
 
Janardan! Tell me, what can be the way to achieve this? If it is possible for humans to do it, then I will definitely make all efforts. ॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)