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mahabharat 1.218.13: उस अत्यंत अद्भुत, विचित्र और कौतूहलपूर्ण उत्सव में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन साथ-साथ विहार कर रहे थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.218.13 
चित्रकौतूहले तस्मिन् वर्तमाने महाद्‍भुते।
वासुदेवश्च पार्थश्च सहितौ परिजग्मतु:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस अत्यंत अद्भुत, विचित्र और कौतूहलपूर्ण उत्सव में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन साथ-साथ विहार कर रहे थे॥13॥
 
In that extremely wonderful, strange and curious festival, Lord Krishna and Arjun were roaming together. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)