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mahabharat 1.217.3-4: भगवान श्रीकृष्ण ने गुप्तचरों द्वारा सुना कि कभी किसी से पराजित न होने वाला अर्जुन परम पवित्र एवं सुन्दर प्रभास क्षेत्र में पहुँच गया है, तब वे अपने मित्र कुन्तीनन्दन से मिलने वहाँ गए। उस समय श्रीकृष्ण और अर्जुन ने एक-दूसरे को प्रकाश में देखा।   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.217.3-4 
प्रभासदेशं सम्प्राप्तं बीभत्सुमपराजितम्।
सुपुण्यं रमणीयं च शुश्राव मधुसूदन:॥ ३॥
ततोऽभ्यगच्छत् कौन्तेयं सखायं तत्र माधव:।
ददृशाते तदान्योन्यं प्रभासे कृष्णपाण्डवौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने गुप्तचरों द्वारा सुना कि कभी किसी से पराजित न होने वाला अर्जुन परम पवित्र एवं सुन्दर प्रभास क्षेत्र में पहुँच गया है, तब वे अपने मित्र कुन्तीनन्दन से मिलने वहाँ गए। उस समय श्रीकृष्ण और अर्जुन ने एक-दूसरे को प्रकाश में देखा।
 
Lord Shri Krishna heard through the spies that Arjun, who was never defeated by anyone, had reached the most sacred and beautiful Prabhas Kshetra, then he went there to meet his friend Kuntinandan. At that time Shri Krishna and Arjun saw each other in the light. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)