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mahabharat 1.217.21: तत्पश्चात् वह अनेक रातों तक श्रीकृष्ण के साथ श्रीकृष्ण के सुन्दर महल में रहा, जो नाना प्रकार के रत्नों और नाना प्रकार के खाद्य पदार्थों से भरा हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.217.21 
कृष्णस्य भवने रम्ये रत्नभोज्यसमावृते।
उवास सह कृष्णेन बहुलास्तत्र शर्वरी:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह अनेक रातों तक श्रीकृष्ण के साथ श्रीकृष्ण के सुन्दर महल में रहा, जो नाना प्रकार के रत्नों और नाना प्रकार के खाद्य पदार्थों से भरा हुआ था।
 
Thereafter he stayed with Shri Krishna for many nights in the beautiful palace of Shri Krishna which was filled with various kinds of gems and various kinds of eatables.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि अर्जुनवनवासपर्वणि अर्जुनद्वारकागमने सप्तदशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अर्जुनवनवासपर्वमें अर्जुनका द्वारकागमनविषयक दो सौ सत्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)