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mahabharat 1.217.13: जनमेजय! इस प्रकार बातें करते हुए अर्जुन उस दिव्य सुखद शय्या पर सो गए॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.217.13 
एवं स कथयन्नेव निद्रया जनमेजय।
कौन्तेयोऽपि हृतस्तस्मिन् शयने स्वर्गसंनिभे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! इस प्रकार बातें करते हुए अर्जुन उस दिव्य सुखद शय्या पर सो गए॥13॥
 
Janamejaya! While talking like this, Arjun fell asleep on that heavenly, pleasant bed. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)