प्रतिगृह्यार्जुन: सर्वमुपभुज्य च पाण्डव:।
सहैव वासुदेवेन दृष्टवान् नटनर्तकान्॥ १०॥
अभ्यनुज्ञाय तान् सर्वानर्चयित्वा च पाण्डव:।
सत्कृतं शयनं दिव्यमभ्यगच्छन्महामति:॥ ११॥
अनुवाद
भगवान् वसुदेव के साथ पाण्डुकुमार अर्जुन ने अपनी रुचि के अनुसार सभी भोजन सामग्री खायी और नर्तकों तथा नर्तकों का नृत्य देखा। तत्पश्चात् उन सबको दान आदि से सम्मानित करके तथा उन्हें विदा करने की आज्ञा देकर महाज्ञानी पाण्डुकुमार अर्जुन सत्कारपूर्वक बिछाये गये दिव्य शय्या पर शयन करने चले गये। 10-11॥
Pandukumar Arjun, along with Lord Vasudeva, ate all the food items presented to his liking and watched the dances of the acrobats and dancers. After that, after honoring them all with gifts etc. and ordering them to go, the great wise Pandukumar Arjuna went to sleep on the divine bed hospitably spread. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥