श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.216.6 
शरणं च प्रपन्नानां शिष्टा: कुर्वन्ति पालनाम्।
शरणं त्वां प्रपन्ना: स्मस्तस्मात् त्वं क्षन्तुमर्हसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'महात्मन् शरणागतों की रक्षा करते हैं। हम भी आपकी शरण में आए हैं, अतः आप हमारे पापों को क्षमा करें।'॥6॥
 
'The great Mahatma protects those who seek refuge. We have also come to you for refuge; therefore, please forgive our sins.'॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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