श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.216.32 
बभ्रुवाहननाम्ना तु मम प्राणो महीचर:।
तस्माद् भरस्व पुत्रं वै पुरुषं वंशवर्धनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मेरा जीवन इस पृथ्वी पर बभ्रुवाहन के नाम से विद्यमान है, अतः तुम इस पुत्र का पालन करो। यही वह पुरुष है जो इस वंश की वृद्धि करेगा ॥32॥
 
'My life is present on this earth in the name of Babhruvahana, hence you take care of this son. This is the man who will increase this dynasty. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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