श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.216.11 
तानि सर्वाणि तीर्थानि तत: प्रभृति चैव ह।
नारीतीर्थानि नाम्नेह ख्यातिं यास्यन्ति सर्वश:।
पुण्यानि च भविष्यन्ति पावनानि मनीषिणाम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे मोक्ष के पश्चात् वे समस्त तीर्थ इस लोक में नारी तीर्थ के नाम से विख्यात होंगे और बुद्धिमान पुरुषों को भी पवित्र करने वाले पवित्र स्थान बनेंगे ॥11॥
 
After your salvation all those places of pilgrimage will be renowned in this world as Nari-tirtha (women's pilgrimage) and will become holy places which purify the wise men also. ॥11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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