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mahabharat 1.215.3-4: उनके नाम इस प्रकार हैं - अगस्त्यतीर्थ, सौभद्रतीर्थ, परम पावन पौलोमतीर्थ, अश्वमेध यज्ञ का फल देने वाले निर्मल करंधमतीर्थ तथा पापों का नाश करने वाले महान भारद्वाजतीर्थ। कौरवों में श्रेष्ठ अर्जुन ने इन पाँच तीर्थों का दर्शन किया। 3-4॥   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.215.3-4 
अगस्त्यतीर्थं सौभद्रं पौलोमं च सुपावनम्।
कारन्धमं प्रसन्नं च हयमेधफलं च तत्॥ ३॥
भारद्वाजस्य तीर्थं तु पापप्रशमनं महत्।
एतानि पञ्च तीर्थानि ददर्श कुरुसत्तम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनके नाम इस प्रकार हैं - अगस्त्यतीर्थ, सौभद्रतीर्थ, परम पावन पौलोमतीर्थ, अश्वमेध यज्ञ का फल देने वाले निर्मल करंधमतीर्थ तथा पापों का नाश करने वाले महान भारद्वाजतीर्थ। कौरवों में श्रेष्ठ अर्जुन ने इन पाँच तीर्थों का दर्शन किया। 3-4॥
 
Their names are as follows – Agastyatirtha, Saubhadratirtha, His Holiness Paulomatirtha, the clean Karandhamathirtha who gives the results of Ashwamedha Yagya and the great Bharadwajatirtha who destroys sins. Arjuna, the best of Kurus, visited these five places of pilgrimage. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)