श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.212.9 
अरक्षितारं राजानं बलिषड्भागहारिणम्।
तमाहु: सर्वलोकस्य समग्रं पापचारिणम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपनी प्रजा की आय का छठा भाग नकद लेता है, किन्तु उसकी रक्षा का कोई प्रबन्ध नहीं करता, वह सम्पूर्ण लोकों में महापापी कहा जाता है॥9॥
 
'A king who collects one-sixth of the income of his subjects in cash but makes no arrangements for their protection is said to be a total sinner in all the worlds.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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