श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.212.7 
ह्रियते गोधनं क्षुद्रैर्नृशंसैरकृतात्मभि:।
प्रसह्य चास्मद्विषयादभ्यधावत पाण्डवा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'पाण्डवों! कुछ नीच, क्रूर और पापी चोर हमारे गाँव से पशुओं को बलपूर्वक चुराकर ले जा रहे हैं। उनकी रक्षा के लिए दौड़ो।
 
'Pandavas! Some vile, cruel and sinful thieves are forcibly stealing the cattle from our village. Run to protect them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)