श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.212.6 
ह्रियमाणे धने तस्मिन् ब्राह्मण: क्रोधमूर्च्छित:।
आगम्य खाण्डवप्रस्थमुदक्रोशत् स पाण्डवान्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अपने गौवंश का हरण होते देख वह ब्राह्मण अत्यन्त क्रोधित हुआ और खाण्डवप्रस्थ में आकर उसने पाण्डवों को ऊँची आवाज में पुकारा-॥6॥
 
Seeing his cattle being abducted, the Brahmin became very angry and coming to Khandavaprastha he called out to the Pandavas in a loud voice -॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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