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mahabharat 1.212.4: महात्मा पाण्डवों के धर्मानुसार आचरण करने के कारण समस्त कुरुवंश निर्दोष और सुखी रहने लगा और निरन्तर उन्नति करने लगा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.212.4 
वर्तमानेषु धर्मेण पाण्डवेषु महात्मसु।
व्यवर्धन् कुरव: सर्वे हीनदोषा: सुखान्विता:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महात्मा पाण्डवों के धर्मानुसार आचरण करने के कारण समस्त कुरुवंश निर्दोष और सुखी रहने लगा और निरन्तर उन्नति करने लगा॥4॥
 
Due to Mahatma Pandavas behaving as per the religion, all the Kuru dynasty remained innocent and happy and started progressing continuously. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)