| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान » श्लोक 32 |
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| | | | श्लोक 1.212.32  | गुरोरनुप्रवेशो हि नोपघातो यवीयस:।
यवीयसोऽनुप्रवेशो ज्येष्ठस्य विधिलोपक:॥ ३२॥ | | | | | | अनुवाद | | यदि बड़ा भाई अपनी स्त्री के साथ घर पर बैठा हो, तो छोटे भाई का वहाँ जाना दोष नहीं है; किन्तु यदि छोटा भाई घर पर हो, तो बड़े भाई का वहाँ जाना उसके धर्म का नाश करता है॥ 32॥ | | | | ‘If the elder brother is sitting with his wife at home, then it is not a fault for the younger brother to go there; however, if the younger brother is at home, then going there by the elder brother destroys his Dharma.॥ 32॥ | | ✨ ai-generated | | |
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