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mahabharat 1.212.22-23: 'विप्रवर! शीघ्र आइए। इससे पहले कि वे क्षुद्र चोर, जो दूसरों का धन हड़पना चाहते हैं, चले जाएँ, हम दोनों साथ-साथ वहाँ पहुँचें। मैं चोरों के हाथ से आपका गौधन छीनकर आपको लौटा दूँगा।'॥ 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  1.212.22-23 
ब्राह्मणागम्यतां शीघ्रं यावत् परधनैषिण:॥ २२॥
न दूरे ते गता: क्षुद्रास्तावद् गच्छावहे सह।
यावन्निवर्तयाम्यद्य चौरहस्ताद् धनं तव॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'विप्रवर! शीघ्र आइए। इससे पहले कि वे क्षुद्र चोर, जो दूसरों का धन हड़पना चाहते हैं, चले जाएँ, हम दोनों साथ-साथ वहाँ पहुँचें। मैं चोरों के हाथ से आपका गौधन छीनकर आपको लौटा दूँगा।'॥ 22-23॥
 
'Vipravar! Come quickly. Before those petty thieves, who want to usurp the wealth of others, go away, let us both reach there together. I will snatch your cattle from the hands of the thieves and return it to you.'॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)