Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.212.20: ‘यदि राजा के तिरस्कार के कारण मुझे नियमभंग करने का महान दण्ड भी मिले अथवा वन में मेरी मृत्यु हो जाए, तो भी शरीर नष्ट होने पर भी गौ-ब्राह्मण-रक्षा धर्म का पालन करना ही श्रेष्ठ है।’ 20॥ | mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अधर्मो वै महानस्तु वने वा मरणं मम।
शरीरस्य विनाशेन धर्म एव विशिष्यते॥ २०॥
अनुवाद
‘यदि राजा के तिरस्कार के कारण मुझे नियमभंग करने का महान दण्ड भी मिले अथवा वन में मेरी मृत्यु हो जाए, तो भी शरीर नष्ट होने पर भी गौ-ब्राह्मण-रक्षा धर्म का पालन करना ही श्रेष्ठ है।’ 20॥
'Even if I get the great punishment of disobeying the rules due to the king's disdain or I die in the forest, even after destroying the body, following the religion of cow-Brahmin-protection is the best.' 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥