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mahabharat 1.212.18: 'यदि मैं राजा का अनादर करके घर के अन्दर जाऊँगा, तो महाराज अजातशत्रु के प्रति मेरी प्रतिज्ञा झूठी हो जाएगी ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.212.18 
अनादृत्य तु राजानं गते मयि न संशय:।
अजातशत्रोर्नृपतेर्मम चैवानृतं भवेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
'यदि मैं राजा का अनादर करके घर के अन्दर जाऊँगा, तो महाराज अजातशत्रु के प्रति मेरी प्रतिज्ञा झूठी हो जाएगी ॥18॥
 
'If I disrespect the king and go inside the house, then my vow to Maharaja Ajatashatru will be false.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)