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श्लोक 1.212.18  |
अनादृत्य तु राजानं गते मयि न संशय:।
अजातशत्रोर्नृपतेर्मम चैवानृतं भवेत्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| 'यदि मैं राजा का अनादर करके घर के अन्दर जाऊँगा, तो महाराज अजातशत्रु के प्रति मेरी प्रतिज्ञा झूठी हो जाएगी ॥18॥ |
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| 'If I disrespect the king and go inside the house, then my vow to Maharaja Ajatashatru will be false.॥ 18॥ |
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