vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान
»
श्लोक 18
श्लोक
1.212.18
अनादृत्य तु राजानं गते मयि न संशय:।
अजातशत्रोर्नृपतेर्मम चैवानृतं भवेत्॥ १८॥
अनुवाद
'यदि मैं राजा का अनादर करके घर के अन्दर जाऊँगा, तो महाराज अजातशत्रु के प्रति मेरी प्रतिज्ञा झूठी हो जाएगी ॥18॥
'If I disrespect the king and go inside the house, then my vow to Maharaja Ajatashatru will be false.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×