श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.212.16 
उपक्षेपणजोऽधर्म: सुमहान् स्यान्महीपते:।
यद्यस्य रुदतो द्वारि न करोम्यद्य रक्षणम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
‘यदि आज मैं राजद्वार पर रोते हुए इस ब्राह्मण की रक्षा न करूँ, तो राजा युधिष्ठिर को उपेक्षा का महान पाप भोगना पड़ेगा।॥16॥
 
'If I do not protect this Brahmin crying at the royal gate today, then King Yudhishthira will have to suffer the great sin of neglect.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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