Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.212.11-12h: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! वह ब्राह्मण पास आकर बहुत रो रहा था। उसकी सारी बातें पाण्डवपुत्र कुन्तीपुत्र धनंजय ने सुनीं और सुनकर महाबाहु धनंजय ने उस ब्राह्मण से कहा - 'डरो मत'।   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  1.212.11-12h 
वैशम्पायन उवाच
रोरूयमाणस्याभ्याशे भृशं विप्रस्य पाण्डव:।
तानि वाक्यानि शुश्राव कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ ११॥
श्रुत्वैव च महाबाहुर्मा भैरित्याह तं द्विजम्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! वह ब्राह्मण पास आकर बहुत रो रहा था। उसकी सारी बातें पाण्डवपुत्र कुन्तीपुत्र धनंजय ने सुनीं और सुनकर महाबाहु धनंजय ने उस ब्राह्मण से कहा - 'डरो मत'।
 
Vaishampayana says - Janamejaya! That Brahmin came near and was crying a lot. Pandava's son Kunti's son Dhananjaya heard all the things he said and on hearing that the mighty-armed man said to that Brahmin - 'Don't be afraid'. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)