Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.212.10: ‘चोर इस ब्राह्मण का धन चुरा रहे हैं। मेरी गाय के अभाव में, दूध और अन्य प्रसाद के अभाव में मैं अपना धर्म और धन खो रहा हूँ। मैं यहाँ आकर रो रहा हूँ। हे पाण्डवों! (चोरों को दण्ड देने के लिए) शस्त्र उठाओ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.212.10 
ब्राह्मणस्वे हृते चौरैर्धर्मार्थे च विलोपिते।
रोरूयमाणे च मयि क्रियतामस्त्रधारणम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘चोर इस ब्राह्मण का धन चुरा रहे हैं। मेरी गाय के अभाव में, दूध और अन्य प्रसाद के अभाव में मैं अपना धर्म और धन खो रहा हूँ। मैं यहाँ आकर रो रहा हूँ। हे पाण्डवों! (चोरों को दण्ड देने के लिए) शस्त्र उठाओ॥10॥
 
‘Thieves are stealing the wealth of this Brahmin. In the absence of my cow, I am losing my religion and wealth due to lack of milk and other offerings. I have come here and am crying. O Pandavas! Take up arms (to punish the thieves)’॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)