श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.211.30 
कृते तु समये तस्मिन् पाण्डवैर्धर्मचारिभि:।
नारदोऽप्यगमत् प्रीत इष्टं देशं महामुनि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
जब धर्म के अनुयायी पाण्डवों ने इस नियम को स्वीकार कर लिया, तब महर्षि नारद प्रसन्न होकर इच्छित स्थान पर चले गये।
 
When the Pandavas, who were followers of Dharma, accepted this rule, the great sage Narada became pleased and went to the desired place. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)