Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.21.12: जब अनंत तेजस्वी भगवान गोविंद ने वराह रूप धारण करके पृथ्वी को प्राप्त किया, तब उन्होंने भीतर से समुद्र का मंथन किया और मंथन के जल के कारण सारा समुद्र गंदा दिखाई देने लगा ॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.21: समुद्रका विस्तारसे वर्णन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गां विन्दता भगवता गोविन्देनामितौजसा।
वराहरूपिणा चान्तर्विक्षोभितजलाविलम्॥ १२॥
अनुवाद
जब अनंत तेजस्वी भगवान गोविंद ने वराह रूप धारण करके पृथ्वी को प्राप्त किया, तब उन्होंने भीतर से समुद्र का मंथन किया और मंथन के जल के कारण सारा समुद्र गंदा दिखाई देने लगा ॥12॥
When the infinitely illustrious Lord Govinda attained the Earth in the form of Varaah, he churned the ocean from within and the entire ocean appeared dirty due to the churned water. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥