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mahabharat 1.208.9: उनके शरीर पर मैल जम गया था। वे वायु पर रहते थे और अपने ही मांस के टुकड़े-टुकड़े करके अग्नि में होम करते थे। तत्पश्चात्, वे बहुत देर तक अपने पैरों के अग्रभागों पर खड़े होकर, भुजाएँ ऊपर उठाए, व्रत और तपस्या करते हुए, एकटक भगवान् को देखते रहे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.208.9 
मलोपचितसर्वाङ्गौ वायुभक्षौ बभूवतु:।
आत्ममांसानि जुह्वन्तौ पादाङ्गुष्ठाग्रविष्ठितौ।
ऊर्ध्वबाहू चानिमिषौ दीर्घकालं धृतव्रतौ॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उनके शरीर पर मैल जम गया था। वे वायु पर रहते थे और अपने ही मांस के टुकड़े-टुकड़े करके अग्नि में होम करते थे। तत्पश्चात्, वे बहुत देर तक अपने पैरों के अग्रभागों पर खड़े होकर, भुजाएँ ऊपर उठाए, व्रत और तपस्या करते हुए, एकटक भगवान् को देखते रहे॥9॥
 
Dirt had accumulated on all their bodies. They lived on air and cut their own flesh into pieces and offered them in the fire. Thereafter, they stood on the tips of their toes for a long time, with their arms raised upwards and kept staring intently at the Supreme Being, observing a vow and performing tapasya.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)