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mahabharat 1.208.8: भूख-प्यास की पीड़ा सहते हुए, सिर पर जटाएं और शरीर पर छाल लिए दोनों भाई बहुत समय तक घोर तपस्या में लगे रहे।   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.208.8 
तौ तु दीर्घेण कालेन तपोयुक्तौ बभूवतु:।
क्षुत्पिपासापरिश्रान्तौ जटावल्कलधारिणौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भूख-प्यास की पीड़ा सहते हुए, सिर पर जटाएं और शरीर पर छाल लिए दोनों भाई बहुत समय तक घोर तपस्या में लगे रहे।
 
Enduring the pain of hunger and thirst, the two brothers, with matted hair on their heads and bark on their bodies, remained engaged in severe penance for a long time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)