Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.208.33: वे राक्षस, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे, वर्षों तक विभिन्न खेलों और मनोरंजनों में व्यस्त रहे; लेकिन पूरा समय उन्हें एक दिन के समान प्रतीत होता था। | mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे राक्षस, जो इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकते थे, वर्षों तक विभिन्न खेलों और मनोरंजनों में व्यस्त रहे; लेकिन पूरा समय उन्हें एक दिन के समान प्रतीत होता था।
Those demons, who could assume any form at will, engaged themselves in various games and amusements for years; but the whole time seemed like a single day to them.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि सुन्दोपसुन्दोपाख्यानेऽष्टाधिक द्विशततमोऽध्याय:॥ २०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमनराज्यलम्भपर्वमें सुन्दोपसुन्दोपाख्यानविषयक दो सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥