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mahabharat 1.208.28: उन दोनों वीरों को वरदान प्राप्त करके तथा अपनी मनोकामना पूर्ण करके लौटते देखकर उनके सभी सम्बन्धी बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.208.28 
तौ तु लब्धवरौ दृष्ट्वा कृतकामौ मनस्विनौ।
सर्व: सुहृज्जनस्ताभ्यां प्रहर्षमुपजग्मिवान्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों वीरों को वरदान प्राप्त करके तथा अपनी मनोकामना पूर्ण करके लौटते देखकर उनके सभी सम्बन्धी बहुत प्रसन्न हुए।
 
On seeing those two brave men returning after receiving the boons and having fulfilled their desires, all their relatives were very happy. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)