Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.208.23: हे दैत्यराजों! तुम दोनों ने तीनों लोकों पर विजय पाने के लिए ही यह तप किया था; इसलिए मैं तुम्हारी अमरता की इच्छा पूरी नहीं कर रहा हूँ॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रैलोक्यविजयार्थाय भवद्भ्यामास्थितं तप:।
हेतुनानेन दैत्येन्द्रौ न वा कामं करोम्यहम्॥ २३॥
अनुवाद
हे दैत्यराजों! तुम दोनों ने तीनों लोकों पर विजय पाने के लिए ही यह तप किया था; इसलिए मैं तुम्हारी अमरता की इच्छा पूरी नहीं कर रहा हूँ॥ 23॥
O kings of demons! You both had undertaken this penance only to gain victory over the three worlds; therefore I am not fulfilling your wish for immortality.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥