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mahabharat 1.208.16: जब इन घटनाओं से उनमें से किसी को भी चिन्ता नहीं हुई और न किसी के हृदय में कोई पीड़ा हुई, तब वे मायावी स्त्रियाँ और राक्षस दोनों ही अदृश्य हो गए ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 208: सुन्द-उपसुन्दकी तपस्या, ब्रह्माजीके द्वारा उन्हें वर प्राप्त होना और दैत्योंके यहाँ आनन्दोत्सव  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.208.16 
यदा क्षोभं नोपयाति नार्तिमन्यतरस्तयो:।
तत: स्त्रियस्ता भूतं च सर्वमन्तरधीयत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब इन घटनाओं से उनमें से किसी को भी चिन्ता नहीं हुई और न किसी के हृदय में कोई पीड़ा हुई, तब वे मायावी स्त्रियाँ और राक्षस दोनों ही अदृश्य हो गए ॥16॥
 
When neither of them was disturbed by these events nor did anyone feel any pain in their hearts, then those illusory women and the demon both disappeared. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)